दिल्ली: अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट एक बार फिर एक ऐतिहासिक और उत्सवपूर्ण पल का गवाह बना। भारत की कूटनीतिक यात्रा को एक नया मोड़ देते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लिया। यह दृश्य केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि दो देशों के बीच बढ़ती मित्रता और सहजता का प्रतीक था।
गांधीनगर में गंभीर चर्चाओं और रणनीतिक वार्ताओं के बाद, दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट के खुले और जीवंत माहौल में पहुँचे। यहाँ प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने एक साथ पतंग उड़ाकर इस अवसर को यादगार बना दिया। चांसलर मर्ज़ के लिए यह भारत की विविधता और परंपराओं को करीब से देखने का एक शानदार अनुभव था।
महोत्सव के दौरान आसमान रंग-बिरंगी और विभिन्न आकारों की पतंगों से पटा हुआ था। हालांकि, दर्शकों और मीडिया के बीच ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ को दर्शाने वाली पतंग विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। इस विशेष पतंग ने न केवल कलात्मकता दिखाई, बल्कि भारत के महत्वपूर्ण मिशनों और उपलब्धियों को भी आकाश की ऊंचाइयों तक पहुँचाया।
पतंगबाजी के साथ-साथ रिवरफ्रंट पर गुजरात की समृद्ध विरासत को दर्शाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
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संगीत और नृत्य: लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से जर्मन प्रतिनिधिमंडल का मन मोह लिया।
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान: यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को भारत की ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा से रूबरू कराने का एक बेहतरीन माध्यम बना।
अहमदाबाद की हवाओं में उड़ती ये पतंगें केवल कागज़ के टुकड़े नहीं थीं, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच की ‘सॉफ्ट पावर कूटनीति’ का हिस्सा थीं। चांसलर मर्ज़ की पहली भारत यात्रा ने यह साबित कर दिया कि जब दो महान राष्ट्र मिलते हैं, तो वे केवल फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति का जश्न भी मनाते हैं।